घर में मामा-भांजे की जोड़ी ने लगा दिए नोटों के ढेर, बाजार में खपाए लाखों तो हुआ खुलासा
खरगोन पुलिस ने बलकवाड़ा से नकली नोट सप्लाई करने वाले गैंग को गिरफ्तार किया है। पुलिस ने इनके पास से 30 लाख 65 हजार रुपये का नकली नोट और मशीन बरामद किया है। सभी नोट 2 हजार और 500 रुपये के हैं, जिन्हें देख कर असली और नकली में फर्क करना मुश्किल है। इन लोगों के लाखों रुपये मार्केट में खपा दिए हैं। उसके बाद घर में नोट छापने की मशील लगा दी थी। गिरोह का सरगना मामा-भांजे की जोड़ी है। एमपी के कई जिलों में बीते दिनों नकली नोट के खिलाफ कार्रवाई हुई है। खरगोन की कार्रवाई सबसे पड़ी है। पुलिस ने यहां भारी मात्रा में नकली नोट जप्त किया है। 6 आरोपियों के साथ पुलिस ने मौके अपूर्ण छपे नकली नोट, 2 प्रिंटर, नोट छापने में उपयोग किए जाने वाले कागज, कट्टर और अन्य उपकरण जप्त किए हैं। खरगोन एसपी शैलेंद्र सिंह ने बताया कि पुलिस को नकली नोट को लेकर लगातार सूचना मिल रही थी। बलकवाड़ा थाना प्रभारी वरुण तिवारी को सूचना मिली कि जितेंद्र नामक व्यक्ति 2000 और 500 के नोट छापने और बेचने का कारोबार करता है। साहिल और संजय नोट सप्लाई का काम करते हैं। इस पर पुलिस को 19 जनवरी को सिंगाजी मंदिर के सामने बलखड़ रोड के पास 5 लोग मोटरसाइकल सहित खड़े होकर लेनदेन करते दिखाई दिए।
लेनदेन कर आरोपी पुलिस को देख वहां से भागने लगे। पुलिस टीम ने घेराबंदी कर आरोपी जितेंद्र को गिरफ्तार किया। उसके पास से करीब 4 लाख 40 हजार रुपये के नकली नोट मिले। यह आगर-मालवा का रहने वाला है। बरामद सभी नोट 2000 और 500 रुपये के हैं। दूसरे आरोपी संजय सिंह जोगी के पास 3 से लाख, साहिल पवन पवार से 3 लाख, अमर सिंह से 5 लाख और विजय सिंह गांव से 2000-500 के नोट जप्त किए हैं। पुलिस ने इनके पास से बरामद नोटों की जांच शुरू की तो सभी नकली पाए गए हैं। आरोपी जितेंद्र ने बताया कि अपने मामा जगदीश रतनलाल तोमर के साथ मिलकर नकली नोट छापने और मार्केट में चलाने और सप्लाई का काम करता था। आरोपी जगदीश से पूछताछ कर ₹4 लाख 65000 के नकली नोट जप्त किए गए हैं। खरगोन एसपी ने बताया कि आरोपियों के पास से कुल 30 लाख 65 हजार रुपये के नकली नोट मिले हैं। इनमें से 2 आरोपी मामा और भांजा हैं। दोनों अब तक 4 लाख रुपये का नोट बाजार में खफा चुके हैं। मुख्य आरोपी ने बताया कि हमारे पास अच्छे क्वालिटी के पेपर होते थे। आरोपियों ने पुलिस को बताया कि पहले कुछ मात्रा में नोटों की छपाई की थी। नोटों की डिमांड बाजार में बढ़ गई थी। उसके बाद बड़ी संख्या में छपाई करने लगे। सभी आरोपियों का काम बंटा हुआ था। छपाई करने वाले लोग सप्लाई का काम नहीं करते थे।

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